काठमाण्डू, ९ आसिन : प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह नेपालक भोटेकोशी नदीमे हालमे आएल बाइढ़ नेपाल लेल मात्र नै, बल्कि सम्पूर्ण विश्व लेल सेहो चेतावनी रहल से बतौलैन अइछ। संयुक्त राष्ट्रसंघक ८१म महासभाकेँ आइ भोरे सम्बोधन करैत प्रधानमन्त्री शाह कहलैन, “एक सप्ताह पहिने विश्व नेपालक हिमाली समुदायक बीच तेजीसँ आएल बाइढ़के भयावह दृश्य देखलक, जाहि बाइढ़केँ बहुतो लोक ‘हिमालयन सुनामी’ कहलैन । भोटेकोशी–त्रिशूली विपत्ति केवल स्थानीय त्रासदी नै छल, ई सम्पूर्ण विश्व लेल सेहो एकटा चेतावनी छल ।”
ओ महासभामे अइ चेतावनीक स्वर सुनल गेल कि नै, से प्रश्न केलैन । हुनक प्रश्न छल, “आइ हम अहाँसभसँ पूछैत छी जे, की हमसभ ओइ चेतावनीकेँ वास्तवमे सुनने छी ?” ओ लगभग तीन वर्ष पहिने संयुक्त राष्ट्रसंघक महासचिव स्वयं नेपालक सगरमाथा क्षेत्रमे ठाढ़ भ विश्वके छत कहल जाएबला हिमाल पघैल रहल छै आ अइसँ विश्वकेँ जलवायु परिवर्तनके खतराक सन्देश भेट रहल छै, से बतौने प्रसङ्गके उल्लेख केलैन । ओ कहलैन, “तीन वर्ष पहिने महासचिव हमर सगरमाथा क्षेत्रमे ठाढ़ भ लगमे आइब रहल जलवायु विपत्तिक भयावह अवस्थाक विषयमे मानवताकेँ चेतावनी देने छलाह । विश्वके छतसँ आएल ओइ चित्कारके आवाज जोरदार रूपसँ नै सुनल गेल । हमसभ नेपालमे सुनलौँ, हमरासभहक समुदाय सुनलक । विश्वभैरके वैज्ञानिकसभ सुनलैन। ओसभ प्रमाण सहित एकरा दोहरबैत रहल, मुदा विश्वके राजनीतिक नेतृत्वमे रहल अपनासभ ओइ चेतावनीकेँ कार्यान्वयनमे बेवास्ता कएलाैँ ।” ओहि बेवास्ताके दुखद परिणाम नेपाल पछिला महिनामे भोटेकोशी बाइढ़क रूपमे आएल प्रधानमन्त्रीक कहल छल । प्रधानमन्त्री शाह तेजीसँ गरम भ रहल जलवायुके कारण नाजुक हिमालयक पारिस्थितिक प्रणाली अस्थिर बनल बतौलैन ।(रासस)















